बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव: भारत में 100% विदेशी निवेश को मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने भारत के बीमा सेक्टर के लिए बड़ा ऐलान किया है. अब इस सेक्टर में 100 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी दे दी गई है यानी कि अब कोई भी विदेशी कंपनी चाहे तो वह भारत के बीमा सेक्टर की कोई भी कंपनी में 100 फीसदी निवेश करके पूरी हिस्सेदारी खरीद सकता है.
संशोधित नीति के तहत, विदेशी निवेशक अब ऑटोमैटिक तरीके से भारतीय बीमा कंपनियों में 100% तक हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं, जिससे एंट्री संबंधी रुकावटें काफी हद तक कम हो जाएंगी और कैपिटल में इजाफा होगा. LIC के लिए रखी गई अलग शर्त हालांकि, LIC के मामले में ऐसा नियम थोड़े अलग रखे गए हैं. LIC में 20 फीसदी का कैप्स लगाया गया है, जिसका मतलब है कि कोई भी विदेशी कंपनी एलआईसी में 20 फीसदी से जयादा निवेश नहीं कर सकती है. इससे कभी भी एलाईसी का कंट्रोल किसी दूसरे देश या फर्मों के पास नहीं जाएगा.
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने प्रेस नोट में कहा कि पोर्टफोलियो निवेश समेत विदेशी निवेश, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की नियामक मंजूरी के तहत अपने आप ही मंजूर होगा. हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में विदेशी निवेश 20% तक सीमित रहेगा.
बीमा कवर बढ़ाने और कैपिटल बढ़ाने के लिए नियम लागू यह नीतिगत बदलाव बीमा कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के अनुसार किया गया है, जिसका उद्देश्य बीमा कवरेज को बढ़ाना और क्षेत्र के पूंजी आधार को मजबूत करना है. इस कानून के अधिकांश प्रावधान 5 फरवरी, 2026 से लागू हो गए हैं. इन नियमों को मानना होगा नियामक निगरानी और घरेलू कंट्रोल तय करने के लिए, विदेशी निवेश वाली बीमा कंपनियों को कम से कम एक भारतीय निवासी नागरिक को चेयरमैंन, मैनेजिंग डायरेक्टर या CEO के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य है. इसके अतिरिक्त, विदेशी शेयरधारिता में किसी भी बढ़ोतरी को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा FEMA नियमों के तहत दिशानिर्देशों का पालन करना होगा. 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा ब्रोकर, पुनर्बीमा ब्रोकर, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड पार्टी, महा एजेंट और बीमा भंडार पर भी लागू होती है, बशर्ते कि वे IRDAI के मानदंडों का पालन करें. भारत ने 2020 में ही मध्यस्थों में पूर्ण विदेशी स्वामित्व की अनुमति दे दी थी
